Tuesday, September 29, 2009

सत्य और सच


क्या आपको मालूम हैकी सत्य और सच में क्या फर्क हैं? सच को हम देख सकते ,परख सकते, सबूत इकट्ठा कर सकते मगर सत्य की परिभाषा ही अलग हैं. मेज पर एक पानी से भरा ग्लास रखा गया हैं. वह ग्लास आधा भरा हुआ और आधा खाली हैं, हमने कुछ लोगो से पूछा, कुछ लोगो ने कहा ग्लास आधा भरा हुआ तो कुछ और लोगो ने कहा आधा खाली हैं अगर हम दोनों पहलुओं  का सही तरीके से विचार करते तो हमें दोनो हीं पहेलूं में सच्चाई नज़र आती हैं. जो लोग आधा भरा हुवा कहते, ओ सकारात्मक दृष्टि से विचार करते है और जो सोचते की आधा खाली, ओ नकारात्मक दृष्टि से देखते हैं. लेकिन दोनो ही पहेलु सच तो हैं, लेकिन सत्य तो कदापि नहीं. क्योंकि सत्य तो यह हैं की, ग्लास पूरा भरा हुवा है. शायद उसमें पदार्थ अलग अलग हैं. आधा ग्लास   पानी से भरा तो आधा ग्लास हवा से भरा हुवा हैं.

                 एक बार समर्थ रामदास एक जगह प्रवचन कर रहे थे, प्रवचन करते समय उन्होंने कहा की परब्रह्म सभी  जगह भरा हुआ हैं. उतने एक आदमी उनके पास एक कटोरा लेकर गया, और कहने लगा इसमें परब्रहम भर दो, तो समर्थ ने कहा, मित्र यह तो पहले से ही भरा हुआ हैं. पहले इस कटोरे को  खाली कर ले आओ बाद मैं इसे परब्रह्म  भर दूँगा.

                               दुनिया में बहुत से ऐसे लोग हैं जो अपनी  आखोंसे देखते हैं. उसे सच मान जाते हैं बहुत ही पुरानी  बात, और इसे हम नए तरीके देखते हैं जैसा की दुसरे की बीवी हरेक को अच्छी लगती, लेकिन कब तक जबतक दूसरा यह शब्द जीवित हैं, तब तक. जब आप दूसरा शब्द निकल देते हैं, तभी सब समांतर दिखने लगते हैं. दूसरा शब्द काल्पनिक हैं, जब हम दूसरा शब्द निकल देते हैं वह सत्य बन जाता हैं. हम इस भौतिक जीवन के आधार से बहुतसे बातों  का निर्णय लेते हैं अगर वही निर्णय अगर हम अध्यात्मिक दृष्टी से परखते है तो हमें सच और सत्य में फर्क मालूम पड़ता है.
कुछ और बातें सच का समय के साथ साथ बदलाव होता हैं. लेकिन सत्य में कोई बदलाव नहीं होता. सत्य के लिए दूसरा पर्याई शब्द ही नहीं हैं.
               समझो आपको आज एक लड़की सुंदर दिखती हैं. इसका मतलब यह तो नहीं की और कुछ दिनों के बाद भी वह सुंदर ही दिखेगी, अगर आपके सामने एक पत्थर रख दिया और पुछा गया यह पत्थर बडा  है या छोटा? तो आपके पास कोई जवाब नहीं होगा, क्यूंकि आप तुलना नही कर सकते, तुलना करने के लिए आपके पास और एक पत्थर की आवश्कता है, तो आप बेहिचक  उत्तेर दे सकते हैं, क्योकि अब हमारे पास प्रमाण हैं, नाप तोल का साधन है, उसी प्रकार आप जिस लड़की को देखा उससे भी कई सुंदर लड़कियां हो सकती हैं. इस के बाद आपकी सोच में परिवर्तन आता हैं. इधर लड़की यह शब्द सत्य हैं लेकिन सुन्दरता यह सच हैं, और समय के साथ साथ सुन्दरता को परखने में भी परिवर्तन  आता है.

JEEVAN

जीवन के इस सफ़र में बहुत से लोग मिलते हैं।
लेकिन कुछ लोग हमेशा के लिए यादगार बन जाते है।
कुछ  लोग जीवन में धुन्दलिसी  यादें छोड़ जाते हैं।
बार बार याद करनेसे कुछ धुन्द्लेसे  चेहरे याद आते हैं।लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं!
जो मददगार बनकर खुद चले आते हैं।
लेकिन हम वही भूल करते हैं।
अक्सर उन्ही लोगोंके चेहरे भूल जाते हैं!
जिसे हम हमेशा पाते हैं,वही चेहरे भूल जाते हैं।

Monday, September 28, 2009

kabir- chahat

चाह मिटी, चिंता मिटी मनवा बेपरवाह । जिसको कुछ नहीं चाहिए वह शहनशाह॥

         जब आदमी को लगता हैं की, मुझे यह चाहिए, मुझे वो चाहिए, लेकिन मिलता वही हैं, जो आपको मिलना है। हमारी चाहतों की कोई सीमा रेखा नहीं होती, लेकिन हर एक को कुछ ना कुछ चाहिए होता, जो आदमी पैदल चलता हैं उसे साइकिल की जरुरत होती है। जिसके पास साइकिल हैं उसे मोटर साइकिल की जरुरत होती हैं। और उसके बाद कार, बाद में कौनसी कार इसके लिए कोई भी सीमा नहीं।
संत कबीर कहते हैं,लेकिन दुनिया कोई ऐसा आदमी है जिसे कुछ भी नहीं चाहिए होता ओ तो राजा से भी बढ़कर हैं। उसके जैसा सुखी  कोई नहीं हो सकता,होता भी नहीं और होगा भी नहीं
ऐसे इंसान राजा ही नहीं बल्कि भगवान् का रूप होते हैं, जैसे की भगवन बुद्धने  आपना सर्वस्व त्याग कर जो मार्ग अपनाया। भारत में ऐसे बहुतसे महत्मा हो गए उनके बारे में जितना भी कहे वो  बहुत ही कम है
जो असलियत में राजा है, वह सच है और संत कबीर ने राजा कहा है वही सत्य है।


My New Peon

Aate jaate khoobsurat awaara sadakon pe kabhi kabhi ittefaq se kitne anjaam log mil jaate hai...
Un me se kuchh log bhool jaate hain, kucchh yaad rah jaate hai...