Sunday, May 14, 2017

ज़माना खराब हैं...




अब तो यारों ज़माना खराब हैं।
पानी के बोतल में भी शराब हैं।

हर एक सवाल का सवाल हैं।
अब हर एक का यही हाल हैं।
हर सवाल में एक ही जवाब हैं।
अब तो यारों ज़माना खराब हैं।

मुझे पता हैं ये तेरीही चाल हैं।
एकेक क्षण मृत्यु और काल हैं।
सपने पुराने अब नयें ख्वाब हैं।
अब तो यारों ज़माना खराब हैं।

जीते हैं हम यहाँ, अपनी  शान हैं।
किन्तु पता नहीं कितना मान हैं।
शान से जीने का यही रुबाब हैं।
अब तो यारों ज़माना खराब हैं।

हाल को अपने हाल पर छोड़ते हैं।
अब जीते हैं जिंदगी को मरोड़ते हैं।
फिर तो अब आप ही तो जनाब हैं।
अब तो यारों ज़माना खराब हैं।

अब अपना हाल भी बेहाल हैं ।
जिंदगी जीने के यह भी चाल हैं।
पी रहे हैं, यह जीना भी शवाब है।
अब तो यारों ज़माना खराब हैं।

 दुनियाँ वालों की यह चाल है।
अब हर किसी का यही हाल हैं।
बार बार ऊपरवालेका दवाब हैं।
अब तो यारों ज़माना खराब हैं।

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